जानिए कैसे बना पत्थर तोड़ने वाला द ग्रेट खली जिसने मचा दी खलबली !!

कभी मेहनत- मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले द ग्रेट खली आज इतने धनवान हो गए है कि अपने गॉंव के विकास के लिए पैसे खर्च करते है । जी हॉं टीनेज के दिनों में उन्हें अपने भाई और पिता के साथ मेहनत करने जाना पड़ता था । ताकि वे अपना पेट पाल सके । पर एक दिन उनकी किस्मत ने यू टर्न लिया की , उनकी दुनिया ही बदल गई । द ग्रेट खली की कहानी किसी फिल्मी हीरो की कहानी से कम नहीं है। द ग्रेट खली का असली नाम दलीप सिंह राणा है। द ग्रेट खली का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के सिराइना गॉंव में , गरीब पंजाबी राजपूत फैमली में हुआ था। उनके पिता ज्वाला राम एक किसान थे और मॉं तंदी देवी एक हाउस वाइफ थी , जो खेती में पति की सहायता करती थी।
बचपन में ळपहंदजपेउ नामक बीमारी से पीड़ित होने के कारण उनका माथा, नाक, ठुडी और कान असामान्य रूप से बड़े हो गए थे , जिसके कारण वह अपने सातों भाई – बहनों और परिवार में सबसे अलग थे। केवल उनके दादा जी की लंबाई ही उनकी लंबाई के करीब थी । 
 परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उनकी पढ़ाई – लिखाई न हो सकी। आगे जिंदगी काटने के लिए उन्हें अपने भाइयों के साथ दूसने गॉंव में जाकर मजदूरी करनी पड़ती थी। ऊंची कद काठी वाला होने के कारण उनके लिए वजन उठाना बांए हाथ का खेल था। जैसे जैसे वे बड़े होते गए , वैसे वैसे बाजार मे उनके पैर की नाप के जूते – चप्पले मिलना मुश्किल होने लगा। इसलिए उन्हें शिमला में एक मोची से जूते और चप्पल बनवाते पड़ते थे।



लोग उनसे मरे हुए जानवरों को एक जगह से दूसरे जगह ले जाना, पत्थर तोड़ना जैसे हैवी काम ज्यादा करवाते थे।
एक दिन पंजाब पुलिस का ऑफिसर शिमला घूमने के लिए आया। जब उसने द ग्रेट खली को देखा तो दंग रह गया। उस ऑफिसर ने उन्हें पंजाब पुलिस में शामिल होने के लिए इंवाईट किया और पंजाब आने के लिए भी पैसा दिया । इस तरह उन्होंने अपने छोटे भाई के साथ पंजाब पुलिस को ज्वाईन कर लिया। उन दिनों ॅतमेजसपदह का बड़ा ही बोल -बाला था। उनका शरीर पहलवानी के लिए एकदम फिट था। तब पंजाब पुलिस ने उन्हें पहलवानी की ट्रेनिंग दिलाई । इसके बाद द ग्रेट खली सन 2000में अमरीका चले गए , जहां उन्होंने ॅॅम् के एक मैच में मात्र 10 मिनट के अंदर अंडरटेकर को हराकर पूरी दुनिया में खलबली मचा दी। इसके बाद बिग शो, मार्क हेनरी और बतिस्ता जैसे पहनवानों को हराकर ॅॅम् खिताब जीत लिया। इस तरह उनका 14 सालों तक ॅॅम् में दबदबा रहा। द ग्रेट खली ने नंबर 2014 में रेस्लिंग की दुनिया से सन्यास ले लिया और आगे के लिए प्लान बनाया कि इंडिया में ही ॅॅम् के लिए ेजंत पिहीजमत की फौज तैयार करेंगें। उन्होंने इंडिया में कई ब्रांच भी खोले हैं। शुरूआत में जब वे रेस्लिंग की दुनिया में गए तो उन्हें कई लोगों ने ळंपदज ेपदही कहा तो कईयों ने दलीप सिंह । वे हिन्दू देवी मॉं काली के परम भक्त हैं। 
इसलिए लोगों ने उन्हें भगवान शिव का नाम सुझाया । पर यह हिन्दू धर्म की आस्था से जुड़ी बात थी। इसलिए उन्होने अपना नाम काली रख लिया पर अग्रेंजों उन्हें खली बुलाने लगे। रेस्लिंग करते हुए उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए हॅालीवुड और बॉलीवुड से भी ऑफर मिला। जिनमें फिल्मों की कहानी पंसद आने पर ऑफर भी असेप्ट करते थे। उनकी हॉलीवुड की डवअपमे ज्ीम सवदहमेज ल्ंतकए ळमज ैउंतज ए डंबळतनइमतए त्ंउंरू ज्ीम ैंअपवनत ए भ्वनइं! व्द जीम ज्तंपस वि जीम डंतेनचपसंउप और बॉलीवुड की फिल्म कुश्ती है। स्वभाव में कोमल द ग्रेट खली का विवाह 2005 में हरमिंदर कौर के साथ हुआ। अब वे जांलधर में अपनी पत्नी के साथ खुशी – खुशी रहते हैं।

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