jindagi

Madhusudan Singh

Image credit: Google
किये क्या अभी तक हिसाब मांगती,
जिंदगी हमारी जवाब मांगती।।
पैरों पर जब से हुए हम खड़े,
हंसने,हँसाने की जिद पर अड़े,
रुके कब,हँसे कब ना कुछ भी खबर,
सभी को हँसाने में हम बेखबर,
थके आज तब मुड़ के देखा मगर,
हैं अपने बहुत पर किसे है खबर,
इसी दर्द का अब हिसाब मांगती,
जिंदगी हमारी जवाब मांगती।।
तरसती,मचलती,गुजरती गयी,
ये जीवन सुलझकर उलझती गयी,
थे जबतक जवाँ संग अपने सभी,
थे मतलब के रिश्ते सभी मतलबी,
ये आँखों का आंसू हिसाब मांगती,
जिंदगी हमारी जवाब मांगती।।
बचपन से अबतक का लंबा सफर,
कठिन राह पर हम चले थे निडर,
पसीने से लतपथ कभी रक्त से,
निडर ना डरे हम कोई खौफ से,
थे आंखों में सपने सपनों में अपने,
अपने कहाँ अब हिसाब मांगती,
जिंदगी हमारी जवाब मांगती।
जिंदगी हमारी जवाब मांगती।।
!!!मधुसूदन!!!

kiye kya abhee tak hisaab maangatee,
jindagee hamaaree javaab maangatee..
pairon par…

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