तेरे इश्क़ में

तेरे इश्क़ में हमको मिले इनाम बहुत हैं|
रूह पर मेरी ज़ख़्मों के निशान बहुत हैं,

दर्द, तन्हाई, तड़प, क्या कुछ नहीं मिला है,
हम पर इक स्क्श के एहसान बहुत हैं|

भरी बहार मे उजड़ा हो चमन जिसका
मत कुरेदो उसे वो इंसान वीरान बहुत है|

उसके दिल मे पनाह लें तो कोई बात है,
बर्ना शहर में पथर के मकान बहुत हैं|

सिल जाते हैं लब उनको देख कर ही
मेरे इस दिल मे वरना अरमान बहुत हैं|

वो फिर आए हैं पैगाम-ए-मुहब्बत लेकर
हाँ कहे के ना या खुदा,परेशान बहुत हैं|

Advertisements

One thought on “तेरे इश्क़ में

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s