रिश्ते: जीवन की अनमोल पूंजी

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रिश्ते टूटते नहीं हैं, तोड़े जाते हैं. रिश्ते कभी मरा नहीं करते अपितु अप्राकृतिक मौत का शिकार होते हैं. समाज में हर मनुष्य का हर किसी से एक रिश्ता होता है. और प्रत्येक रिश्ते की एक गरिमा एवम् मर्यादा होती है जिसका निर्वहन परम आवश्यक है. समस्या तभी उत्पन्न होती है जब हम अपने स्वार्थ में लिप्त होकर किसी रिश्ते की गरिमा को ठेस पहुँचते हैं. और अन्य के हितों को भूल कर अपना हित साधने लगते हैं. रिश्ते हमारे जीवन का विशिष्ट अंग हैं. आईए! इन्हे सहेज कर रखें.
1. रिश्तों में अहम् को जगह ना दें. प्रत्येक व्यक्ति का विशिष्ट स्वभाव होता है. उसके स्वभाव के लिए अपना उच्च कोटि का व्यवहार मलिन न करें. याद रखें! बुराई को अच्छाई से ही जीता जा सकता है.
2. बात करें मगर विवादित मुद्दों पर नहीं.
3. बोलें मगर नम्र और धीमे स्वर में. याद रखें! टीवी पर ऊँचे स्वर में बोल कर अपना पक्ष रखने वाले एंकर अथवा पार्टी प्रवक्ता अक्सर हमे अच्छे नहीं लगते हैं. आप रविश कुमार या अर्नव गोस्वामी का उदाहरण देख सकते हैं.

रिश्तों को अगर जंग की तरह जीतने की कोशिश करेंगे तो बेशक हम जंग जीत भी जाएँ मगर रिश्ते ज़ख्मी हो जाएँगे. प्यार से जीतीए. अपने व्यवहार को उच्च कोटि का बना कर रखें. जिंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से गुज़र रही है. याद रखा जाएगा तो हमारा व्यवहार. श्री ए पी जे अबुल कलाम आज मिसायल की वजह से कम जाने जाते हैं मगर उनकी सादगी और नम्र व्यवहार की मिसाल आज भी कायम है.

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