नवाला:- शिव पूजा के रूप में मनाया जाने वाला त्यौहार

शिव पूजा के रूप में मनाया जाने वाला गद्दी जनजाति का त्यौहार

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यह एक परिवारिक त्यौहार है जो हर परिवार को जीवन में एक बार मनाना ज़रूरी है, नवाला का अर्थ है नव-माला या नौ मालाओं का रूप. इसके लिए सारे घर को सजाया जाता है,पूजा वाले कमरे को गोबर से लीप कर आटे से उसमें पीढ़ियाँ(रंगोली जैसी कोई भी आकृति) बनाई जाती है,शिव भगवान की मूर्ति के साथ कैलाश पर्वत आदि बनाए जाते हैं!पिंडी के आस पास फूलों और गन्दम,दालों से सजाया जाता है! पुरोहित पूजा आरंभ करते हैं, नवाला करवाने बाला व्यक्ति भेंट चाड़ाता है, बकरे की बलि चड़ाई जाती है और सारी रात शिव महिमा और देविक गीत भजन गाये जाते हैं जिन्हे सथानीय भाषा में” एंचाली” कहते है!

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पूजा के समय किसी आदमी को शिव को भेंट चाड़ते समय “खेल” आती है,जो प्रशण पूछे जाने पर खेल में उनका उत्तर देता है ऐसा माना जाता है की उसके मध्यम से शिव सव्यं बोलते हैं! और उसके बाद सभी लोग नाच-गाना करते हैं और पूजा संपन्न होने के बाद प्रषाद लेके लोग अपने अपने घर चले जाते हैं!

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ऐसे ही कुछ त्यौहार जो पहले सांस्कृतिक और सामाजिक होते थे अब बह ख़तम होते जा रहे हैं,अब लोग ज़्यादातर इनमे अपनी आर्थिक संपन्नता का दिखावा करते हैं!बिकास और लोगो के विश्वास में परिवर्तन के कारण अब यह प्राचीन परंपरायें धीरे-धीरे कम होने लगी हैं!

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